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Ponzi Schemes: Protect yourself from scams by learning the structure behind these fraudulent investing arrangements

साथियों  ,
                             
धोखेबाज/घोटालेबाज हमेशा आम जनता को अपने जाल में फँसाने के नित नवीन साधन व उपाय ढूँढते रहते हैं. भोले-भाले निवेशकों को कम समय में अत्याधिक लाभ का लालच देने वाली अनैतिक योजनाओं, जिन्हें पोंजी योजना कहा जाता है,  निवेश का एक ऐसा ही साधन है. इन अभागे निवेशकों से इकठठा किए गए धन को जटिल लेन-देन की प्रक्रिया से गुजारकर वैध बनाने का प्रयास किया जाता है.



एक इटालियन व्यक्ति कार्लोस चार्ल्स पोंजी जोकि देश परिवर्तन के बाद 1903 में अमरीका चला गया, के द्वारा पहली बहुप्रचारित ऐसी योजना चलाई गयी थी. उसके नाम पर इन योजनाओं को पोंजी योजना कहा जाने लगा. उसने डिस्काउंट रेट पर अन्तर्राष्ट्रीय जवाबी कूपन जारी करने के नाम पर जनता के साथ धोखाधड़ी की और 10550 व्यक्तियों से 9.8 मिलियन डॉलर की राशि इकठठा की. बीसवीं सदी के अन्त में  अन्तर्राष्ट्रीय जवाबी कूपन, विदेशी डाक भेजने का एक प्रचलित माध्यम था. यह डाक भेजने वाले को डाक टिकट शुल्क अदा करने का एक वाउचर था.  चार्ल्स पोंजी ने जनता को विदेशी डाक सेवा हेतु  अन्तर्राष्ट्रीय जवाबी कूपन के विभिन्न देशों में मूल्यान्तर के आधार पर बेचने हेतु निवेश का एक विचार निकाला. ये कूपन ऐसे देशों में बेचे गए जहाँ इनका मूल्य ज्यादा था और  मूल्यान्तर को निवेशकों में बाँटा गया.   चार्ल्स पोंजी ने अपने निवेशकों को कम समय में ही 50% प्रतिफल का वचन देकर पूरी तरह निचोड़ लिया. यह बुलबुला कुछ महीनों बाद ही फूट गया और  चार्ल्स पोंजी ने लाखों निवेशकों को कंगाल कर दिया. जल्द लखपति होने की ऐसी ही योजना अनेक अन्य धोखेबाजों द्वारा भी शुरू की गई जैसे कि "बर्नी मैडोर्फ", जिसने निवेशकों को प्रलोभन देकर उन्हें ठगने की विभिन्न योजनाएं लॉन्च की. इन सभी योजनाओं की कार्यपद्धति प्राय: एक समान थी, बाजार में उपलब्ध निवेश योजनाओं से कहीं ऊँची लाभ दर. जाल में फँसने वाले निवेशकों के लिए उनके धन के उपार्जक प्रयोग की जानकारी कोई बहुत अधिक महत्व नही रखती और अल्प समय में आकर्षक प्रतिफल का वचन उन्हें कंगाल बना देता है.

पौंजी योजना प्राय: निम्न अवस्थाओं से गुजरती है :-

प्रारम्भ :-  प्रारंभिक अंशदान या निवेश प्राप्त होते है
मान्यकरण :-  प्रारंभिक अंशधारकों को आसानी से आकर्षक प्रतिफल मिलते है और योजना का व्यापक प्रचार- प्रसार हो जाता है.
विस्तार :-  बड़े स्तर पर जनता योजना से जुड़ना शुरु कर देती है और योजना जारीकर्ता को भारी निवेश राशि प्राप्त होती है.
पतन :-  योजना में चूक होती है और योजना जारीकर्ता निवेशकों का धन लेकर भाग जाता है.
 योजना बनाने वाला जब पर्याप्त निवेशकों को अपनी बनाई योजना से जोड़ लेता है, तब वह निवेशकों से प्राप्त धन का उपयोग किराये पर ऑफिस लेने व कुछ आकर्षक फर्नीचर खरीदने पर व्यय करता है. इसके बाद घोटालेबाज एकत्र किए गए धन का एक हिस्सा अपने पास रखकर शेष राशि में से पुराने निवेशकों को कुछ प्रतिफल के साथ धन लौटाना शुरू कर देता है. तीसरे राऊन्ड के निवेशकों से प्राप्त धन को दूसरे राऊन्ड के निवेशकों को लौटाने के साथ -२ पहले राऊन्ड के निवेशकों को और प्रतिफल दिया जाता है. निवेशकों को जोड़ने का यह सिलसिला चलता रहता है. नये निवेशकों को उनकी प्रारम्भिक राशि लौटाने हेतु आश्वस्त किया जाता है. योजना बनाने वाले का सर्वाधिक ध्यान नये निवेशकों को जोड़ने पर रहता है ताकि पिछले राऊन्ड के निवेशकों को प्रतिफल दिया जा सके. कुछ समय बाद योजना में निवेश करने वाले व्यक्ति नगण्य रह जाते है और योजना फ्लाप हो जाती है क्योंकि यह योजना किसी निवेश पद्धति पर आधारित नही होती जोकि इतना अधिक प्रतिफल दे सके.  प्राय: यह देखा गया है कि योजना के माध्यम से एकत्र की गई राशि को विदेशों में पार्क किया जाता है और धनशोधन के बाद उसे देश में वापिस लाया जाता है.  इससे निवेशकों के धन की वसूली बहुत अधिक कठिन हो जाती है.

प्रलोभन में फँसो : धन गंवाओं

निवेशकों से उदाहरणत: रूपये 1,000/- की राशि को एक माह में दुगना करने के वचन के साथ योजना की शुरुआत की जाती है लेकिन योजना में अपना धन निवेश करने के स्थान पर योजना जारी कर्ता योजना में जुड़ने वाले नए निवेशकों के धन से वापसी की प्रक्रिया अपनाता है.
                                                     पोंजी योजना का पिरामिड
योजना जारी कर्ता

प्रथम राऊन्ड प्रथम माह में योजना जारी कर्ता प्रथम दो
2 निवेशक निवेशकों से रूपये 1,000/- लेता है

दितीय राऊन्ड योजना में रुपये 2,000/- इकठठे हो गये,
4 निवेशक योजना  कर्ता की जरूरत रुपये 4,000/- की है. दितीय माह 4 निवेशक – वचन किए गए प्रतिफल को लौटाने के लिए

तीसरा  राऊन्ड योजना कर्ता की जरूरत रुपये  8,000/- की 8 निवेशक         है. उसे 8 नये निवेशक जोड़ने है.  अपने लिए धन रखने हेतु वह प्रत्येक निवेशक से  रुपये 1,000/-  से अधिक इकठठा करना चाहेगा

  चौथे महीने में उसे 16 निवेशक चाहिए और यह क्रम चलता रहता है.

दसवें  राऊन्ड तक पहुँचने हेतु उसे 1,024 नये निवेशक चाहिए. अठारवें राऊन्ड तक पहुँचते- पहुँचते निवेशकों की संख्या ढाई लाख से अधिक होगी.

यह देखा गया है कि चालबाज अपनी योजनाओं में गरीब, निम्न मध्यम वर्ग व कम शिक्षित वर्ग को फँसाने का प्रयास करते है पर अधिक आय वर्ग व शिक्षित वर्ग भी इनसे अछूता नही रहता है.

पौंजी योजनाएँ विश्व भर के देशों के अर्थव्यवस्था के लिए बेहद घातक साबित हुई है. अल्बानिया में इन योजनाओं के असफल होने पर हुए उपद्रवों में 2000 लोगों के प्राण चले गए व मुद्रा का अवमूल्यन करने पर राजस्व की भारी क्षति हुई.  कीनिया, नामीबिया, नाइजीरिया व जमैका आदि देशों में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई. भारत में अनुमानत : 80,000/- करोड़ की निवेशकों की राशि पी. ए. सी. एल., सारधा, रोज वैली, स्पीक एशिया आदि योजनाओं में फँस चुकी है. इनमें ज्यादातर धन छोटे निवेशकों की वास्तविक आय का सफेद धन था, जोकि पोंजी ठगों की लूट से धन शोधित हो काला धन बन गया यद्यपि ऐसी पिरामिड योजनाएं प्राइज चिट व मनी सर्कुलेशन एक्ट 1978 के अंतर्गत संवैधानिक अपराध है तदापि ऐसी योजनाएं न तो किसी नियंत्रण के आधीन है और न ही योजना कर्ता के लिए कोई वैधानिक प्रकटीकरण या विवरणी की आवश्यकता है. निवेशकों को अप्रत्याशित प्रलोभन के वचन की जाँच हेतु कोई वितीय ढांचा उपलब्ध नही है जो जाँच या ऑडिट का कार्य कर सके. भारतीय वित्तीय ढाँचें व सम्बंधित नियमों में कमियाँ होने से निवेशकों के संरक्षण व उनकी शिकायतों का निवारण कठिन हो गया है. विभिन्न नियामक संस्था होने से निवेशक भ्रमित रहता है कि वह अपनी शिकायत किससे करें और नियामकों के बीच का यह दूरी निवेशक के लिए एक बुरे स्वपन की भांति है. सभी निवेशकों को यह समझना चाहिए कि पूरे विश्व भर में कही भी निवेश किए धन पर अप्रत्याशित प्रतिफल  नही मिल सकता. यदि हमारी जानकारी में ऐसी कोई योजना आती है तो हमें न केवल स्वंय को बचाना चाहिए बल्कि अपने मित्रों, सम्बन्धियों व सहयोगियों को भी इस ठगी के मार्ग पर चलने से बचाना चाहिए.


स्नेह दीप अग्निहोत्री,

Comments

  1. I have posted a comment not able to see it

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  2. What about BC Schemes chit funds SAHARA formation all are looting middle class people

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